कोई
ऐसा एक रंगा चित्र लीजिए, जिसमें अनेक वस्तुएँ दिखाई पड़ती हों। सीनरी के
चित्र इस कार्य के लिये अच्छे बैठते हैं। एक चित्र को एक मिनट ध्यान से
देखिये, फिर एक कागज पर लिखिये कि उसमें क्या-क्या चीजें देखीं ? बाद में
अपने लिखे हुए कागज और चित्र का मुकाबला करके देखिये कि आप क्या-क्या बातें
लिखना भूल गए हैं? अब दूसरा चित्र लीजिए और उसे देखिए तथा पूर्ववत् उसमें
देखी हुई चीजों को भी लिखिए, तत्पश्चात् परीक्षा कीजिए कि अबकी बार क्या
छोड़ा गया ? एक चित्र एक बार ही काम में लेना चाहिए, क्योंकि दूसरी बार कोई
चीज छूटना प्रायः कठिन है। एक दिन में दो-तीन चित्रों का अभ्यास काफी
होगा। यह जरूरी नहीं है कि इतने चित्र खरीदें तभी काम चले। सचित्र पुस्तकों
में अनेक चित्र आते हैं, ऐसी एक किताब में कई दिन का काम चल सकता है।एक
मिनट का अभ्यास ठीक हो जाए तो फिर समय घटाना चाहिए औरधीरे-धीरे एक-दो सेकंड
देखकर ही चित्र का पूरा विवरण लिखने का अभ्यास करना चाहिए।
एक रंग के
चित्र के बाद बहुरंग चित्र का अभ्यास है। इसमें दीखने वाली चीजों का स्वरूप
और रंग दोनों लिखते जाइये, यह दूसरा अभ्यास है। इसलिए आरंभ काल में देखने
के लिए एक मिनट से कुछ अधिक समय भी लिया जा सकता है, फिर क्रमशः घटाते
जावें। कुछ दिन लगातार चित्र दर्शन और लेखन का अभ्यास करने पर स्मरण शक्ति
का काफी विकास हुआ मालूम होता है।
No comments:
Post a Comment