जीवन की सामान्य आवश्यकताएँ साधारण प्रयत्नों से पूरी हो जाती हैं। प्रकृति ने ये सारी वस्तुएँ इतनी आसानी से इसलिए उपलब्ध करा रखी हैं कि उसकी संतानों को जीवन निर्वाह में कोई कष्ट या असुविधा न हो और वह सरलतापूर्वक अपनी आवश्यकताओं को पूरा करते हुए अपना विकास कर सकें। प्रकृति ने जिस उद्देश्य से मनुष्य के लिए आवश्यक वस्तुएँ उपलब्ध करने की व्यवस्था जुटाई है, वह है मनुष्य का नैतिक, बौद्धिक और आत्मिक स्तर का विकास, उन्नयन तथा उच्च स्थिति में आरोहण।
-पं. श्रीराम शर्मा आचार्य
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