किसी तरह की आज्ञा देते समय अथवा अनुशासन पालन की आदत के लिए यह जानना और समझना भी आवश्यक है कि बच्चा उस समय क्या कर रहा है। उदाहरणार्थ बच्चा अपने किसी दिलचस्प खेल में लगा हुआ है, एकाग्रता से पढ़ रहा है अथवा अपने बाल मित्रों के साथ खेलकूद में मस्त है तो ऐसे समय किसी तरह की आज्ञा नहीं देनी चाहिए। ऐसी स्थित में प्रायः बच्चे आज्ञा नहीं माना करते। यदि उनके साथ जबरदस्ती और रौब दबाव का व्यवहार किया गया तो उनमें रूठने, चिल्लाने, मचलने की आदतें पड़ जाएँगी और फिर हर बात में बच्चे विपरीतता अर्थात् आज्ञा उल्लंघन, अनुशासनहीनता का परिचय देंगे।
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